ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का विवादित पोस्ट, वेनेजुएला को लेकर नई सनसनी वाशिंगटन। अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट साझा की। पहले ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और सैन्य कार्रवाई के दावों […]
‘बॉर्डर 2’ का तीसरा गाना ‘जाते हुए लम्हों’ हुआ रिलीज
मुख्यमंत्री धामी ने स्वदेशी संकल्प दौड़ का किया शुभारंभ
युवाओं को स्वदेशी अपनाने का किया आह्वान देहरादून। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांधी पार्क देहरादून में स्वदेशी संकल्प दौड़ का शुभारंभ किया। इस अवसर मुख्यमंत्री ने स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनको नमन किया। स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं को उन्होंने […]
विराट कोहली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पूरे किए 28,000 रन, ऐसा करने वाले दुनिया के तीसरे बल्लेबाज बने
कोटद्वार में 15 जनवरी से अग्निवीर भर्ती रैली, 13 हजार से अधिक अभ्यर्थी होंगे शामिल
रैली के दौरान सुरक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन के व्यापक इंतजाम, रोज पहुंचेंगे 1100 अभ्यर्थी देहरादून। भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में राष्ट्र सेवा का पहला चरण लिखित सामान्य प्रवेश परीक्षा (CEE) 2025 उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों के लिए अब अगला चरण प्रारंभ होने जा रहा है। अग्निवीर भर्ती रैली का आयोजन 15 जनवरी 2026 […]
ठंड को देखते हुए देहरादून में स्कूलों के समय में बदलाव, 31 जनवरी तक सुबह 8:30 बजे के बाद खुलेंगे स्कूल
उत्तराखंड में सूखे जैसे हालात, कम बारिश-बर्फबारी से खेती, पर्यटन और पर्यावरण पर संकटदेहरादून/चमोली/श्रीनगर। उत्तराखंड में इस सर्दी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला नजर आ रहा है। सामान्य से बेहद कम बारिश और बर्फबारी ने राज्य की आर्थिकी, खेती और पर्यावरण तीनों को गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में जहां आमतौर पर दिसंबर में बर्फ की मोटी परत जम जाती थी, वहीं इस बार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी जमीन सूखी पड़ी है। सबसे चौंकाने वाली स्थिति 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ क्षेत्र में सामने आई है, जहां जनवरी के मध्य तक भी बर्फ नहीं गिरी। स्थानीय लोगों और वैज्ञानिकों के अनुसार यह पहली बार है जब तुंगनाथ क्षेत्र पूरी तरह बर्फविहीन रहा है। विशेषज्ञ इसे बदलते जलवायु चक्र का गंभीर संकेत मान रहे हैं। खेती पर सबसे ज्यादा मार बारिश न होने से पर्वतीय और मैदानी जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। कृषि विभाग की रिपोर्ट बताती है कि गेहूं की फसल को कई जिलों में 15 से 25 प्रतिशत तक नुकसान पहुंच चुका है। उत्तरकाशी, चमोली, टिहरी, देहरादून, नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में फसल की बढ़वार प्रभावित हुई है। पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकांश खेती असिंचित है और पूरी तरह वर्षा पर निर्भर रहती है। ऐसे में बारिश के अभाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई जगह फसल का जमाव कमजोर है और पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। बागवानी और सेब उत्पादन पर भी खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि बर्फबारी न होने से सेब और अन्य फलों की पैदावार पर भी असर पड़ सकता है। सेब की फसल के लिए 1000 से 1500 घंटे का शीतलन जरूरी होता है, जो इस बार पूरा होता नहीं दिख रहा। इससे आने वाले मौसम में उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है। जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक चक्र प्रभावित तुंगनाथ स्थित गढ़वाल विश्वविद्यालय के एल्पाइन रिसर्च सेंटर में दुर्लभ औषधीय पौधों पर हो रहे शोध भी प्रभावित हुए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार अल्पाइन क्षेत्र की कई जड़ी-बूटियां शीतकालीन बर्फ पर निर्भर रहती हैं। बर्फ न होने से उनके अंकुरण, वृद्धि और औषधीय गुणों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बढ़ती वनाग्नि ने बढ़ाई चिंता बारिश और बर्फबारी के अभाव में जंगलों की नमी खत्म हो रही है, जिससे आग की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। वन विभाग के अनुसार नवंबर के बाद से प्रदेश में तीन दर्जन से अधिक वनाग्नि की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें कई हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग ने दी उम्मीद मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है और जनवरी के दूसरे सप्ताह के बाद बारिश व बर्फबारी की संभावना बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द मौसम में बदलाव नहीं हुआ तो इसका असर आने वाले महीनों में और गहरा हो सकता है। कुल मिलाकर, उत्तराखंड इस समय मौसम की असामान्य परिस्थितियों से जूझ रहा है, जिसका असर सिर्फ वर्तमान पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की आजीविका और पर्यावरण संतुलन पर भी पड़ सकता है।
पैक्ड जूस और एनर्जी ड्रिंक बन रहे ‘मीठा जहर’, वैज्ञानिकों ने जारी किया अलर्ट
Sweet Poison Packaged Juices: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में खान-पान की आदतें स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कई गंभीर बीमारियों की जड़ हमारी रोज़मर्रा की डाइट में छिपी है। खास तौर पर मीठे पेय पदार्थ—जैसे सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेट बंद जूस, फ्लेवर्ड मिल्क और एनर्जी […]
खुटियाखाल में तेंदुए का हमला, महिला की मौत से गांव में दहशत
सांस्कृतिक विरासत के वाहक हैं उत्तराखंड के मेले : रेखा आर्या
कटारमल सूर्य मंदिर में सूर्य पर्व मेले में शामिल हुई कैबिनेट मंत्री कटारमल/अल्मोड़ा । कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने रविवार को अल्मोड़ा के कटारमल स्थित ऐतिहासिक सूर्य मंदिर में आयोजित सूर्य पर्व मेले में हिस्सा लिया। यह आयोजन पौष माह के अंतिम रविवार को प्रतिवर्ष किया जाता है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या […]
