Headline
केंद्र सरकार विकास और सुशासन के लिए काम कर रही- अमित शाह
केंद्र सरकार विकास और सुशासन के लिए काम कर रही- अमित शाह
गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्कार्दू में विरोध-प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा, गोलीबारी में 38 लोगों की मौत
गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्कार्दू में विरोध-प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा, गोलीबारी में 38 लोगों की मौत
चारधाम यात्रा 2026- हेली शटल सेवा के टेंडर अंतिम दौर में, जल्द शुरू होंगी सुविधाएँ
चारधाम यात्रा 2026- हेली शटल सेवा के टेंडर अंतिम दौर में, जल्द शुरू होंगी सुविधाएँ
किडनी स्टोन को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, समय पर इलाज जरूरी
किडनी स्टोन को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, समय पर इलाज जरूरी
पार्टी कार्यकर्ताओं संग हरिद्वार रवाना हुए कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी
पार्टी कार्यकर्ताओं संग हरिद्वार रवाना हुए कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी
जन औषधि केंद्र आज करोड़ों जरूरतमंद लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं- मुख्यमंत्री धामी
जन औषधि केंद्र आज करोड़ों जरूरतमंद लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं- मुख्यमंत्री धामी
‘चरक: फियर ऑफ फेथ’ की बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत, फिल्म ने पहले दिन कमाए इतने रुपये
‘चरक: फियर ऑफ फेथ’ की बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत, फिल्म ने पहले दिन कमाए इतने रुपये
नगर निगम का पहला फूड कोर्ट डेस्टिनेशन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में, जल्द खुलेगा आम जनता के लिए
नगर निगम का पहला फूड कोर्ट डेस्टिनेशन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में, जल्द खुलेगा आम जनता के लिए
सार्वजनिक संपत्ति और सौन्दर्यीकरण कार्यों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई- बंशीधर तिवारी
सार्वजनिक संपत्ति और सौन्दर्यीकरण कार्यों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई- बंशीधर तिवारी

भारत की राष्ट्रीयता पश्चिमी ‘राष्ट्रवाद’ की अवधारणा से पूरी तरह अलग- आरएसएस प्रमुख

भारत की राष्ट्रीयता पश्चिमी ‘राष्ट्रवाद’ की अवधारणा से पूरी तरह अलग- आरएसएस प्रमुख

मोहन भागवत बोले— झगड़ा भारत का स्वभाव नहीं, समरसता हमारी संस्कृति की पहचान

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत की मूल पहचान सदैव भाईचारे, सहअस्तित्व और सामाजिक सद्भाव की रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाद और टकराव भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं रहे हैं, बल्कि संवाद और आपसी समझ हमारी परंपरा की आधारशिला हैं।

“भारत की परंपरा संघर्ष नहीं, समरसता की रही है” – भागवत

अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि भारतीय समाज किसी से टकराव की भावना नहीं रखता। उन्होंने कहा, “हमारी किसी से बहस नहीं होती। हम विवादों से दूर रहते हैं। झगड़ा करना हमारे देश का स्वभाव ही नहीं है। मिल-जुलकर रहना और भाईचारे को बढ़ावा देना ही हमारी परंपरा है।”

आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि दुनिया के कई क्षेत्रों में संघर्ष की परिस्थितियों से समाज विकसित हुआ, जहां एक विचार हावी होने पर अन्य विचारों को पूरी तरह नकार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों पर विविध सोच के लिए जगह नहीं होती और उन्हें अक्सर ‘…इज्म’ कहकर सीमित कर दिया जाता है।

“भारतीय राष्ट्र का विचार पश्चिमी सोच से भिन्न है”

मोहन भागवत ने अपने भाषण में भारतीय राष्ट्रीयता की अवधारणा पर भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी दुनिया अक्सर भारत के राष्ट्र संबंधी विचार को समझ नहीं पाती, इसलिए उसे ‘राष्ट्रवाद’ कहकर परिभाषित कर देती है।

भागवत ने कहा, “भारत प्राचीन काल से एक राष्ट्र रहा है। हमारे यहाँ राष्ट्र का भाव गर्व या अहंकार से नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संस्कृति और प्रकृति के साथ सहअस्तित्व से उपजा है। हम ‘राष्ट्रीयता’ शब्द का उपयोग करते हैं, ‘राष्ट्रवाद’ का नहीं।”

उन्होंने कहा कि अत्यधिक राष्ट्रवादी गौरव से दुनिया दो विश्वयुद्ध झेल चुकी है, इसलिए कुछ लोग इस शब्द को लेकर आशंकित रहते हैं। वहीं भारत का राष्ट्रीय बोध शांत, समावेशी और संतुलित विचारों पर आधारित है।

Back To Top