Health – TEJAS BUZZ https://tejasbuzz.com National News Portal Wed, 22 Apr 2026 10:41:57 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://tejasbuzz.com/wp-content/uploads/2022/12/fav.png Health – TEJAS BUZZ https://tejasbuzz.com 32 32 सीढ़ियां चढ़ते ही फूलने लगती है सांस? तो डाइट में शामिल करें ये चीजें, मिलेगा फायदा https://tejasbuzz.com/do-you-start-gasping-for-breath-the-moment-you-climb-the-stairs-then-incorporate-these-items-into-your-diet-you-will-reap-the-benefits/ Wed, 22 Apr 2026 10:41:57 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=24573

आजकल कई लोग सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थकान या सांस फूलने की शिकायत करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह केवल बढ़ती उम्र का संकेत नहीं, बल्कि शरीर में पोषण की कमी, कमजोर मांसपेशियां या कम सहनशक्ति का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में खानपान में कुछ जरूरी बदलाव करके शरीर की ऊर्जा और फेफड़ों की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।

संतुलित आहार न सिर्फ शरीर को ताकत देता है, बल्कि दिल और फेफड़ों को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। आइए जानते हैं ऐसे कौन से खाद्य पदार्थ हैं, जिन्हें रोजाना की डाइट में शामिल कर सीढ़ियां चढ़ते समय होने वाली सांस फूलने की समस्या को कम किया जा सकता है।

दूध और डेयरी उत्पाद
दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद शरीर को प्रोटीन और कैल्शियम देते हैं। ये हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ मांसपेशियों को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे जल्दी थकान नहीं होती।

हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक, मेथी और सरसों जैसी सब्जियों में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है, जिससे ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और सांस फूलने की समस्या कम हो सकती है।

मौसमी फल
केला, सेब, संतरा और पपीता जैसे फल शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं। इनमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स शरीर की कमजोरी दूर करने में मददगार होते हैं।

नट्स और बीज
बादाम, अखरोट, अलसी और सूरजमुखी के बीज शरीर को हेल्दी फैट और प्रोटीन देते हैं। इनके सेवन से शरीर की सहनशक्ति बढ़ती है और दिल भी स्वस्थ रहता है।

प्रोटीन युक्त आहार
अंडे, दालें, सोयाबीन और चिकन जैसे खाद्य पदार्थ मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं। नियमित रूप से प्रोटीन लेने से शरीर ज्यादा एक्टिव रहता है और सीढ़ियां चढ़ते समय कमजोरी कम महसूस होती है।

साबुत अनाज
ओट्स, दलिया और ब्राउन राइस जैसे साबुत अनाज शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं। ये ब्लड शुगर को संतुलित रखते हैं और शरीर को जल्दी थकने नहीं देते।

पर्याप्त पानी
शरीर में पानी की कमी होने पर भी जल्दी सांस फूलने लगती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी और नारियल पानी जैसे हाइड्रेटिंग ड्रिंक लेना जरूरी है।

नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लगातार बने रहने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं डिटॉक्स वाटर, जानिए किन लोगों को नहीं पीना चाहिए https://tejasbuzz.com/detox-water-is-not-beneficial-for-everyone-find-out-who-should-avoid-drinking-it/ Tue, 21 Apr 2026 07:49:10 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=24530

गर्मियों में खुद को ठंडा और तरोताजा रखने के लिए लोग डिटॉक्स वाटर का सहारा लेने लगे हैं। नींबू, खीरा, पुदीना और अलग-अलग फलों से तैयार यह ड्रिंक हेल्थ ट्रेंड का हिस्सा बन चुका है। इसे शरीर को हाइड्रेट रखने और टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मददगार माना जाता है, लेकिन हर किसी के लिए यह उतना सुरक्षित नहीं होता जितना दिखता है।

दरअसल, बिना अपनी सेहत और शरीर की जरूरतों को समझे डिटॉक्स वाटर पीना कई बार फायदे के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ खास स्वास्थ्य समस्याओं में इसका सेवन स्थिति को और बिगाड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले सही जानकारी और सावधानी बरती जाए।

आइए जानते हैं किन लोगों को डिटॉक्स वाटर से दूरी बनानी चाहिए या सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए—

1. पेट संबंधी दिक्कत वाले लोग
जिन लोगों को एसिडिटी, गैस या पेट में जलन की समस्या रहती है, उनके लिए नींबू या खट्टे फलों वाला डिटॉक्स वाटर परेशानी बढ़ा सकता है। इससे पेट में जलन, खट्टी डकार और असहजता बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे लोगों के लिए सादा पानी या नारियल पानी बेहतर विकल्प हो सकता है।

2. किडनी से जुड़ी समस्या वाले मरीज
किडनी के मरीजों को डिटॉक्स ड्रिंक लेते समय सावधानी बरतनी चाहिए। कई बार इसमें मौजूद मिनरल्स और पोटैशियम की अधिक मात्रा किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है, जिससे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का खतरा बढ़ जाता है।

3. लो ब्लड प्रेशर वाले लोग
लो बीपी की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए ज्यादा मात्रा में डिटॉक्स वाटर पीना ठीक नहीं है। यह शरीर को ठंडा करता है और ब्लड प्रेशर को और कम कर सकता है, जिससे चक्कर या कमजोरी महसूस हो सकती है।

4. एलर्जी वाले लोग
अगर आपको खीरा, पुदीना या किसी फल से एलर्जी है, तो डिटॉक्स वाटर पीने से पहले सतर्क रहें। इससे स्किन रैशेज, खुजली या सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

5. गर्भवती महिलाएं
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर काफी संवेदनशील होता है। ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के डिटॉक्स वाटर या किसी भी खास ड्रिंक का सेवन करना जोखिम भरा हो सकता है। कुछ तत्व हार्मोनल संतुलन पर असर डाल सकते हैं, इसलिए विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

निष्कर्ष:
डिटॉक्स वाटर भले ही हेल्दी ट्रेंड हो, लेकिन इसे हर किसी के लिए सुरक्षित मानना सही नहीं है। अपनी शारीरिक स्थिति और जरूरतों के अनुसार ही इसका सेवन करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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क्या आपका बच्चा भी अक्सर मोबाइल फोन से चिपका रहता है, तो जान लीजिये इसके गंभीर नुकसान https://tejasbuzz.com/does-your-child-also-frequently-remain-glued-to-their-mobile-phone-if-so-be-aware-of-its-serious-harmful-effects/ Mon, 20 Apr 2026 07:21:30 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=24496

आज के दौर में मोबाइल फोन बच्चों के लिए खिलौना नहीं, बल्कि एक आदत बन चुका है। कई बच्चे ऐसे हैं जो बिना फोन के कुछ देर भी नहीं रह पाते। हालांकि यह सुविधा जितनी आसान लगती है, उतनी ही चुपचाप बच्चों की सेहत पर नकारात्मक असर भी डाल रही है, जिसका अंदाजा अक्सर माता-पिता को देर से होता है।

डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। पढ़ाई, मनोरंजन और ऑनलाइन पेमेंट जैसे कई काम अब मोबाइल के जरिए ही होते हैं। लेकिन यही सुविधा बच्चों के लिए एक चुनौती बनती जा रही है। माता-पिता अक्सर बच्चों को व्यस्त रखने के लिए उन्हें मोबाइल दे देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है और उनके शारीरिक व मानसिक विकास पर असर डालने लगती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम ज्यादा होता है, उनमें कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। बचपन वह समय होता है जब दिमाग तेजी से विकसित होता है, शरीर मजबूत बनता है और सामाजिक व्यवहार सीखने का मौका मिलता है। लेकिन जब बच्चे ज्यादा समय मोबाइल स्क्रीन पर बिताते हैं, तो उनकी शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं और वे सामाजिक रूप से भी कमजोर पड़ने लगते हैं।

आंखों पर असर
लगातार मोबाइल स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। इससे आंखों में जलन, सूखापन और धुंधलापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। छोटे बच्चों की आंखें अधिक संवेदनशील होती हैं, इसलिए ब्लू लाइट का असर उन पर जल्दी पड़ता है और कम उम्र में ही चश्मे की जरूरत तक पड़ सकती है।

दिमागी विकास पर प्रभाव
ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने से बच्चों की एकाग्रता कमजोर होने लगती है। वे पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाते और जल्दी बोर हो जाते हैं। लगातार वीडियो देखने या गेम खेलने की आदत उनके आईक्यू और भाषा विकास पर भी असर डाल सकती है।

नींद और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर
मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट बच्चों की नींद को प्रभावित करती है। इससे नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है और शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता। इसके अलावा, जब बच्चे खेलकूद की बजाय मोबाइल में समय बिताते हैं, तो मोटापा बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है।

व्यवहार और सामाजिक जीवन पर असर
मोबाइल की लत बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव ला सकती है। ऐसे बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं, अकेले रहना पसंद करते हैं और दूसरों के साथ घुलने-मिलने में परेशानी महसूस करते हैं।

निष्कर्ष
मोबाइल का सीमित और सही उपयोग ही बच्चों के लिए सुरक्षित है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखें और उन्हें खेलकूद, पढ़ाई और सामाजिक गतिविधियों में संतुलन बनाना सिखाएं, ताकि उनका संपूर्ण विकास प्रभावित न हो।

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पाचन संबंधी समस्याओं से लेकर डायबिटीज और सर्दी-जुकाम में भी फायदेमंद है अमरूद https://tejasbuzz.com/guava-is-beneficial-for-everything-from-digestive-issues-to-diabetes-and-even-the-common-cold/ Sun, 19 Apr 2026 04:50:33 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=24468

आजकल बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती बीमारियों के बीच सही खानपान का चुनाव बेहद जरूरी हो गया है। खासकर डायबिटीज, सर्दी-जुकाम और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए फल एक बेहतर विकल्प माने जाते हैं। इन्हीं में से एक है अमरूद—एक ऐसा फल जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी कई तरह से फायदेमंद साबित होता है।

अमरूद को पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। इसका लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स इसे डायबिटीज के मरीजों के लिए एक सुरक्षित और फायदेमंद फल बनाता है, क्योंकि यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ने देता।

आयुर्वेद के अनुसार, अमरूद को भूनकर खाना और भी ज्यादा लाभकारी हो सकता है। खासकर सर्दी-खांसी और जुकाम में यह एक घरेलू उपाय की तरह काम करता है। भुना हुआ अमरूद कफ को कम करने, गले की खराश को शांत करने और कंजेशन से राहत देने में मदद करता है। इसे हल्का सा काला नमक डालकर खाने से इसका असर और बढ़ जाता है।

मौसम बदलने के दौरान एलर्जी की समस्या भी आम हो जाती है। ऐसे में अमरूद का सेवन शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ एलर्जी के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकता है। इसमें मौजूद गुण शरीर में हिस्टामाइन के असर को संतुलित करने में मदद करते हैं, जिससे एलर्जिक रिएक्शन कम होते हैं।

पाचन से जुड़ी समस्याओं में भी अमरूद काफी फायदेमंद है। इसका फाइबर पेट को साफ रखने में मदद करता है और कब्ज, गैस व ब्लोटिंग जैसी दिक्कतों से राहत दिलाता है। भुना हुआ अमरूद पेट के एसिडिक स्तर को संतुलित करता है, जिससे पेट फूलने और दर्द की समस्या में आराम मिलता है।

इसके अलावा, अमरूद दिल की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम हो सकता है। नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और सामान्य स्वास्थ्य सलाह के आधार पर तैयार की गई है।

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क्या आपको भी पेट में गैस और भारीपन की समस्या है? तो इन घरेलू उपायों से पाएं राहत https://tejasbuzz.com/do-you-also-suffer-from-gas-and-heaviness-in-the-stomach-then-find-relief-with-these-home-remedies/ Thu, 16 Apr 2026 07:27:08 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=24388

आजकल सुबह उठते ही पेट में गैस और भारीपन की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों के कारण बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसे नजरअंदाज करना आगे चलकर पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर परेशानियों का कारण बन सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सुबह के समय गैस बनना केवल अस्थायी परेशानी नहीं, बल्कि शरीर के पाचन तंत्र में गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है। देर रात भोजन करना, ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना, साथ ही अनियमित दिनचर्या इस समस्या को बढ़ा देती है।

डॉक्टर्स के अनुसार, अगर समय रहते कुछ आसान उपाय और दिनचर्या में बदलाव किए जाएं, तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

गुनगुना पानी फायदेमंद
सुबह उठते ही गुनगुना पानी पीना पाचन क्रिया को सक्रिय करता है और पेट की सफाई में मदद करता है। इससे गैस, कब्ज और अपच की समस्या कम हो सकती है।

अजवाइन और काला नमक असरदार
अजवाइन में मौजूद गुण पाचन को बेहतर बनाते हैं। काला नमक के साथ इसका सेवन करने से पेट की सूजन और गैस से राहत मिलती है।

अदरक से मिलेगा फायदा
अदरक को प्राकृतिक पाचन सुधारक माना जाता है। इसका सेवन गैस बनने की प्रक्रिया को कम करता है और भोजन को जल्दी पचाने में मदद करता है।

नींबू-शहद का मिश्रण उपयोगी
गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।

योग और एक्सरसाइज जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित योग और हल्की एक्सरसाइज पेट की गैस को कम करने में मददगार साबित होती है। पवनमुक्तासन, भुजंगासन और प्राणायाम जैसे अभ्यास पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं।

नोट:
यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। लगातार समस्या होने पर डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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क्या आप भी खाते हैं ज्यादा तीखा और मसालेदार खाना? अगर हां, तो जान लीजिये इसके नुकसान https://tejasbuzz.com/do-you-also-consume-excessively-spicy-and-hot-food-if-so-be-aware-of-its-harmful-effects/ Wed, 15 Apr 2026 07:32:45 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=24355

अगर आपकी थाली में हर दिन तीखा और मसालेदार खाना शामिल रहता है, तो यह खबर आपके लिए अहम है। भारत में चटपटे स्वाद का क्रेज खूब है—चाहे स्ट्रीट फूड हो या घर का खाना, तीखापन स्वाद को बढ़ा देता है। लेकिन यही आदत धीरे-धीरे आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा मिर्च-मसाले का सेवन शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।

दरअसल, सीमित मात्रा में मसाले जहां स्वाद और पाचन के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, वहीं अधिक मात्रा में इनका सेवन नुकसानदेह साबित होता है। लंबे समय तक तीखा खाना खाने की आदत पेट, त्वचा, नींद और पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डाल सकती है। आइए जानते हैं इसके प्रमुख दुष्प्रभाव—

पेट में जलन और एसिडिटी बढ़ना
अत्यधिक मसालेदार भोजन पेट में एसिड का स्तर बढ़ा देता है, जिससे सीने में जलन, गैस और खट्टी डकार जैसी समस्याएं होने लगती हैं। समय के साथ यह समस्या लगातार बनी रह सकती है।

पाचन तंत्र पर पड़ता है दबाव
ज्यादा तीखा खाना आंतों को प्रभावित करता है, जिससे अपच, पेट दर्द और दस्त जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कमजोर पाचन वाले लोगों में यह असर ज्यादा देखने को मिलता है।

मुंह और गले में जलन
मिर्च-मसाले का अधिक सेवन मुंह और गले की सतह को नुकसान पहुंचाता है, जिससे जलन, छाले और सूजन की समस्या हो सकती है।

अल्सर का बढ़ता खतरा
लगातार मसालेदार भोजन पेट की आंतरिक परत को नुकसान पहुंचाता है, जिससे गैस्ट्रिक अल्सर होने की आशंका बढ़ जाती है। यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है।

त्वचा पर दिखता है असर
ज्यादा मसालेदार खाना शरीर की गर्मी बढ़ाता है, जिससे पिंपल्स, एक्ने और स्किन रेडनेस जैसी समस्याएं उभर सकती हैं।

पाइल्स की समस्या हो सकती है गंभीर
तीखा भोजन मल त्याग के दौरान जलन और दर्द बढ़ा सकता है, जिससे बवासीर के मरीजों को ज्यादा परेशानी होती है।

नींद पर भी पड़ता है असर
रात में ज्यादा मसालेदार खाना खाने से शरीर में बेचैनी बढ़ती है, जिससे नींद प्रभावित होती है और बार-बार नींद टूट सकती है।

संयम जरूरी, स्वाद भी जरूरी
स्वाद के लिए मसालेदार खाना ठीक है, लेकिन इसकी मात्रा पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार अपनाकर ही आप अपनी सेहत को लंबे समय तक बेहतर बनाए रख सकते हैं।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है।

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रसोई का साधारण मसाला, पेट की समस्याओं का असरदार इलाज https://tejasbuzz.com/a-common-kitchen-spice-an-effective-remedy-for-stomach-ailments/ Sat, 11 Apr 2026 08:15:56 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=24252

तेज गर्मी के साथ बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान का असर सबसे पहले हमारे पाचन तंत्र पर दिखाई देता है। गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं, जिनसे राहत पाने के लिए लोग तुरंत दवाइयों का सहारा लेते हैं। लेकिन राहत का एक आसान और प्राकृतिक तरीका आपकी रसोई में ही मौजूद है—जीरा, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखता है।

जीरा एक ऐसा मसाला है, जिसका उपयोग हर घर में होता है, लेकिन इसके औषधीय गुण अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, जीरा पाचन क्रिया को मजबूत बनाने के साथ शरीर को ठंडक भी देता है, जो खासकर गर्मियों में बेहद फायदेमंद साबित होता है।

जीरे में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, आयरन और फाइबर पाचन तंत्र को सक्रिय करते हैं। यह न सिर्फ भोजन को बेहतर तरीके से पचाने में मदद करता है, बल्कि गैस और अपच जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाता है। साथ ही, यह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है, जिससे गर्मी के असर को कम किया जा सकता है।

जीरे के फायदे:
जीरा पाचन एंजाइम्स को सक्रिय कर भोजन के पाचन को आसान बनाता है। यह पेट में गैस और भारीपन को कम करता है और ऐंठन जैसी समस्याओं में भी राहत देता है। इसके अलावा, यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर करता है, जिससे वजन नियंत्रण में भी सहायता मिलती है। अगर भूख कम लगती है, तो जीरा उसे बढ़ाने में भी कारगर साबित होता है।

सेवन के तरीके:
जीरे का इस्तेमाल कई आसान तरीकों से किया जा सकता है। सुबह खाली पेट जीरा उबालकर उसका पानी पीना पाचन के लिए लाभकारी होता है। वहीं, भुने हुए जीरे का पाउडर दही या छाछ में मिलाकर लेने से पेट को ठंडक मिलती है। इसके अलावा, गुनगुने पानी में जीरा और शहद मिलाकर पीने से पेट से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है।

सावधानियां:
हालांकि जीरा फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में लेने से एसिडिटी या जलन हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। अगर पेट की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो घरेलू उपायों के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

नोट:
यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सुझावों पर आधारित है। किसी भी गंभीर समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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खीरा खाने का सही समय कौन सा है? आइये जानते हैं क्या कहते हैं विशेषज्ञ https://tejasbuzz.com/what-is-the-right-time-to-eat-cucumber-lets-find-out-what-the-experts-say/ Fri, 10 Apr 2026 10:04:48 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=24210

गर्मियों का मौसम आते ही खाने-पीने की आदतों में भी बदलाव दिखने लगता है और इस दौरान खीरा लोगों की पहली पसंद बन जाता है। पानी से भरपूर और ठंडक देने वाला खीरा सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसका सेवन कब और कैसे किया जाए, यह जानना उतना ही जरूरी है। सही समय पर खाया गया खीरा जहां शरीर को लाभ पहुंचाता है, वहीं गलत समय पर इसका सेवन परेशानी का कारण बन सकता है।

खीरा एक ऐसा खाद्य पदार्थ है, जिसे लोग अक्सर बिना सोचे-समझे किसी भी समय खा लेते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इसका सेवन समय और शरीर की स्थिति के अनुसार होना चाहिए। खासतौर पर दिन के समय, विशेषकर दोपहर में खीरा खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। सुबह खाली पेट भी इसका सेवन किया जा सकता है, लेकिन रात में इसे खाने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसकी ठंडी तासीर पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

अगर खीरे का सेवन गलत समय पर किया जाए, तो इससे पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। रात में खीरा खाने से गैस, अपच और पेट फूलने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके अलावा अधिक मात्रा में खाने से भी शरीर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर है या जिन्हें सर्दी-जुकाम की समस्या रहती है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

वहीं, सही समय पर और संतुलित मात्रा में खीरे का सेवन शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी होता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है, वजन नियंत्रित करने में सहायक होता है और त्वचा को स्वस्थ व चमकदार बनाता है। साथ ही यह पाचन तंत्र को बेहतर करता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी मदद करता है।

खीरा खाने का सही तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसे हमेशा ताजा और अच्छी तरह धोकर ही खाना चाहिए। छिलके सहित खाने से इसके पोषक तत्व अधिक मिलते हैं। आप इसे सलाद, रायता या जूस के रूप में अपने आहार में शामिल कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि इसमें अत्यधिक नमक न डालें, क्योंकि इससे इसके गुण प्रभावित हो सकते हैं।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है।

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प्लास्टिक स्ट्रॉ बन सकती है सेहत की दुश्मन, जानिए इसके नुकसान https://tejasbuzz.com/plastic-straws-can-become-an-enemy-to-your-health-learn-about-their-harmful-effects/ Thu, 09 Apr 2026 07:29:44 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=24170

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सुविधाजनक विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन कई बार यही सुविधाएं स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाती हैं। बाजार में मिलने वाले जूस और कोल्ड ड्रिंक्स के साथ इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक स्ट्रॉ भी ऐसा ही एक उदाहरण है, जो अनजाने में शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है।

प्लास्टिक स्ट्रॉ देखने में भले ही साधारण और उपयोगी लगती हों, लेकिन इनमें मौजूद केमिकल्स धीरे-धीरे शरीर में प्रवेश कर स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार उपयोग से यह कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती हैं।

हार्मोनल असंतुलन का खतरा
प्लास्टिक स्ट्रॉ में मौजूद बिस्फेनॉल-ए (BPA) जैसे तत्व शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। इससे थायरॉइड, प्रजनन क्षमता और अन्य हार्मोन से जुड़ी समस्याएं बढ़ने की आशंका रहती है।

दिल की सेहत और वजन पर असर
प्लास्टिक से निकलने वाले रसायन शरीर के मेटाबोलिज्म को प्रभावित करते हैं, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, यह मोटापे की समस्या को भी बढ़ावा दे सकते हैं।

कैंसर का बढ़ता जोखिम
लंबे समय तक प्लास्टिक के संपर्क में रहने से शरीर में हानिकारक तत्व जमा हो सकते हैं, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। खासकर महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

बच्चों पर अधिक प्रभाव
बच्चों का शरीर अधिक संवेदनशील होता है, इसलिए प्लास्टिक स्ट्रॉ के केमिकल्स उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं। उनकी इम्युनिटी पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।

क्या करें बचाव के लिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्लास्टिक स्ट्रॉ के बजाय सुरक्षित विकल्प अपनाने की सलाह देते हैं। स्टेनलेस स्टील, कांच या बायोडिग्रेडेबल स्ट्रॉ बेहतर विकल्प हैं। इनके इस्तेमाल से न केवल स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है।

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क्या चीनी खाने से बढ़ता है हृदय रोग का खतरा, आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ https://tejasbuzz.com/does-consuming-sugar-increase-the-risk-of-heart-disease-lets-find-out-what-health-experts-have-to-say/ Tue, 07 Apr 2026 07:59:33 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=24134

आज की तेज रफ्तार जिंदगी और बदलती खानपान की आदतों के बीच हृदय रोग एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभर रहे हैं। अक्सर लोग दिल की सेहत को लेकर नमक और तेल पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन रोजमर्रा की डाइट में शामिल अधिक चीनी भी उतनी ही खतरनाक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अनजाने में बढ़ती शुगर की मात्रा दिल समेत पूरे शरीर पर गहरा असर डाल रही है।

वर्तमान समय में हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं और इसका दायरा अब हर उम्र वर्ग तक पहुंच चुका है। डॉक्टरों का मानना है कि खराब जीवनशैली, असंतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। खासतौर पर खानपान में बढ़ती चीनी की मात्रा एक छिपा हुआ खतरा बनती जा रही है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जहां ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर बढ़ाकर दिल को नुकसान पहुंचाता है, वहीं अत्यधिक चीनी का सेवन भी हृदय रोगों के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। आमतौर पर चीनी को डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका असर सीधे दिल की सेहत पर भी पड़ता है।

दरअसल, पैकेज्ड फूड, सॉफ्ट ड्रिंक, मिठाइयों और प्रोसेस्ड चीजों में छिपी अतिरिक्त चीनी शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ाती है, जिससे मोटापा बढ़ता है। मोटापा ही आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगों का बड़ा कारण बनता है।

अध्ययनों के मुताबिक, ज्यादा चीनी का सेवन शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाता है, जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और गुड कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता है। यह स्थिति धमनियों में फैट जमा होने का कारण बनती है, जिससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अधिक चीनी शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) को बढ़ाती है, जो रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इससे दिल की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है और लंबे समय में गंभीर हृदय रोग विकसित हो सकते हैं।

कार्डियोलॉजिस्ट्स की सलाह है कि दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल नमक ही नहीं, बल्कि चीनी का सेवन भी सीमित करना बेहद जरूरी है। खासतौर पर मीठे पेय पदार्थ जैसे कोल्ड ड्रिंक, सोडा और पैकेट वाले जूस से दूरी बनाना चाहिए, क्योंकि इनमें अत्यधिक मात्रा में शुगर मौजूद होती है।

इसके अलावा, ज्यादा मीठे पेय पदार्थ केवल दिल ही नहीं बल्कि लिवर के लिए भी नुकसानदायक होते हैं। इनमें मौजूद फ्रुक्टोज लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे समय के साथ लिवर संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

विशेषज्ञ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को अपनाने की सलाह देते हैं। ताजे फल-सब्जियों का सेवन बढ़ाना और प्रोसेस्ड व मीठी चीजों से दूरी बनाना दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकता है।

(साभार)

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