lifestyle – TEJAS BUZZ https://tejasbuzz.com National News Portal Fri, 07 Aug 2026 10:29:47 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://tejasbuzz.com/wp-content/uploads/2026/08/cropped-Tejas-Buzz-Logo-02-32x32.jpg lifestyle – TEJAS BUZZ https://tejasbuzz.com 32 32 बालों को लंबा, घना और चमकदार बनाना है? रोजाना खाएं ये पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स https://tejasbuzz.com/to-make-hair-long-thick-and-shiny/ Fri, 07 Aug 2026 10:29:47 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=27605

मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी और पसीने की वजह से बालों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। इस मौसम में हेयर फॉल, डैंड्रफ और बालों का बेजान होना आम बात है। ऐसे में सिर्फ महंगे शैंपू या हेयर सीरम पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाना भी जरूरी है। सही खानपान बालों को जड़ों से पोषण देकर उन्हें मजबूत, घना और चमकदार बनाए रखने में मदद कर सकता है।

बारिश के मौसम में स्कैल्प पर गंदगी, अतिरिक्त ऑयल और नमी जमा होने से बाल कमजोर होने लगते हैं। यदि शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, आयरन, बायोटिन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, जिंक और विटामिन्स नहीं मिलते, तो इसका असर बालों की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित डाइट अपनाकर बालों का झड़ना कम किया जा सकता है और उनकी ग्रोथ को बेहतर बनाया जा सकता है।

इन फूड्स को डाइट में करें शामिल

1. अंडा
अंडा उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन और बायोटिन का अच्छा स्रोत माना जाता है। यह बालों की जड़ों को मजबूती देने और नए बालों के विकास में मदद कर सकता है।

2. पालक
पालक में आयरन, फोलेट, विटामिन A और विटामिन C भरपूर मात्रा में होते हैं। ये पोषक तत्व स्कैल्प को स्वस्थ रखने और बालों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं।

3. बादाम और अखरोट
इन ड्राई फ्रूट्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन E और जिंक पाया जाता है, जो बालों को टूटने से बचाने और उनकी प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद करते हैं।

4. दही
दही में मौजूद प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स स्कैल्प की सेहत सुधारने के साथ-साथ बालों की जड़ों को भी पोषण देते हैं।

5. फैटी फिश
सैल्मन जैसी मछलियां ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती हैं, जो बालों को घना, मुलायम और स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

6. शकरकंद
शकरकंद में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में विटामिन A में बदल जाता है, जो बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है।

7. आंवला
विटामिन C से भरपूर आंवला कोलेजन बनाने में मदद करता है और बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में उपयोगी माना जाता है।

8. फ्लैक्स सीड्स और चिया सीड्स
इन बीजों में ओमेगा-3, प्रोटीन और जिंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बालों की गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकते हैं।

9. दालें
दालें प्रोटीन, आयरन और जिंक का अच्छा स्रोत हैं। नियमित सेवन से बालों को आवश्यक पोषण मिलता है और हेयर फॉल की समस्या कम हो सकती है।

10. मौसमी फल
संतरा, अमरूद, कीवी और बेरीज जैसे फल एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C से भरपूर होते हैं, जो बालों को फ्री-रेडिकल्स से बचाने और उन्हें स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।

बालों की देखभाल के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
रोजाना पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त भोजन लें।
दिनभर में 2 से 3 लीटर पानी जरूर पिएं।
पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित रखें।
स्कैल्प की नियमित सफाई करें।
जरूरत से ज्यादा केमिकल युक्त हेयर प्रोडक्ट्स और हीट स्टाइलिंग से बचें।
संतुलित आहार के साथ नियमित हेयर केयर रूटीन अपनाएं।

नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। यदि बालों का झड़ना लंबे समय तक जारी रहे या अत्यधिक बढ़ जाए, तो त्वचा एवं बाल रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) से सलाह लेना उचित रहेगा।

(साभार)

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घर बैठे-बैठे रहना चाहते हैं फिट- तो वजन घटाने और मेटाबॉलिज़्म बढ़ाने के लिए इन योगासनों का करें अभ्यास https://tejasbuzz.com/want-to-stay-fit-at-home-then-practice-these-yoga-poses-to-lose-weight-and-increase-your-metabolism/ Fri, 17 Oct 2025 11:08:48 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=19226

आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में जिम जाना या लंबे समय तक एक्सरसाइज करना सभी के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में योग एक ऐसा असरदार साधन है, जो कम समय और मेहनत में शरीर और मन दोनों को फिट रख सकता है। खास बात यह है कि कुछ योगासन सीधे बैठे-बैठे भी किए जा सकते हैं, जो पेट की चर्बी कम करने, मेटाबॉलिज़्म बढ़ाने और मानसिक तनाव घटाने में मददगार होते हैं।

बैठे-बैठे किए जाने वाले योगासन न केवल शरीर को लचीला बनाते हैं, बल्कि पाचन शक्ति और कैलोरी बर्निंग को भी बेहतर करते हैं। आइए जानते हैं कुछ आसान और प्रभावी योगासनों के बारे में:

1. वज्रासन
यह आसन पाचन शक्ति बढ़ाने और फैट बर्न करने में मदद करता है। भोजन के बाद वज्रासन करने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और पेट व कमर की चर्बी घटती है। अभ्यास के लिए घुटनों के बल बैठें, एड़ियों पर कूल्हे टिकाएं और रीढ़ को सीधा रखें।

2. सुखासन ट्विस्ट
कमर और पेट की चर्बी घटाने के लिए सुखासन ट्विस्ट बहुत प्रभावी है। इसमें कमर को धीरे-धीरे दाएं-बाएं मोड़ने से पेट की मांसपेशियां एक्टिव होती हैं और कैलोरी बर्न होती है। अभ्यास के लिए सुखासन में बैठकर दाहिने हाथ को बाएं घुटने पर रखें और शरीर को धीरे मोड़ें।

3. पद्मासन ब्रीदिंग
मेटाबॉलिज़्म बढ़ाने और तनाव घटाने के लिए पद्मासन ब्रीदिंग सबसे अच्छा है। पद्मासन में बैठकर गहरी सांसें लेने और छोड़ने से ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे शरीर शांत होता है और वजन तेजी से घटता है।

4. मंडूकासन
यह आसन पेट की अतिरिक्त चर्बी को कम करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। डायबिटीज और मोटापे से प्रभावित लोगों के लिए बेहद लाभकारी है। अभ्यास के लिए वज्रासन में बैठें, मुट्ठियां नाभि पर रखें और धीरे आगे झुकें।

5. अर्ध मत्स्येन्द्रासन
इस आसन से शरीर में जमी विषैले तत्व निकलते हैं और मांसपेशियों में खिंचाव आता है। पेट, कमर और जांघों की चर्बी कम करने के लिए यह अत्यंत उपयोगी है। अभ्यास के लिए जमीन पर बैठें, एक पैर मोड़ें और दूसरे पैर को उसके ऊपर रखकर शरीर को विपरीत दिशा में मोड़ें।

निष्कर्ष:
बैठे-बैठे किए जाने वाले ये योगासन न केवल वजन घटाने में मदद करते हैं, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करते हैं और शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखते हैं। रोज़ाना 10-15 मिनट इन आसनों का अभ्यास करने से लंबे समय तक फिटनेस और सेहत बनाए रखी जा सकती है।

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क्या अत्यधिक रनिंग करने से बढ़ सकता है कोलन कैंसर का रिस्क? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स https://tejasbuzz.com/can-excessive-running-increase-the-risk-of-colon-cancer-learn-what-experts-say/ Sat, 04 Oct 2025 07:01:32 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=18792

अच्छी सेहत के लिए फिटनेस एक्सपर्ट्स हमेशा नियमित शारीरिक गतिविधि पर जोर देते हैं। रनिंग और वॉकिंग जैसे साधारण अभ्यास न सिर्फ कैलोरी बर्न करने और वजन नियंत्रित रखने में मदद करते हैं, बल्कि हृदय स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए भी बेहद लाभकारी माने जाते हैं। सुबह की रनिंग तो खासतौर पर इम्यून सिस्टम को मजबूत करने और मूड बेहतर बनाने के लिए जानी जाती है।

हालांकि, हाल के कुछ अध्ययनों ने चेतावनी दी है कि जहां संतुलित रनिंग शरीर के लिए वरदान है, वहीं अत्यधिक और लगातार लंबी दौड़ करने से कोलन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) का खतरा भी बढ़ सकता है।

रनिंग के फायदे

पिछले कई शोध बताते हैं कि नियमित दौड़ना असमय मृत्यु के खतरे को कम करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल लगभग 32 लाख लोग पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न करने की वजह से समय से पहले मौत का शिकार होते हैं। ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन की रिपोर्ट कहती है कि रनिंग करने वालों में हृदय रोग से मौत का खतरा 30% और कैंसर से मौत का खतरा 23% तक कम हो सकता है।

हालिया शोध में नई सावधानी

लेकिन इसी बीच शिकागो में हुई अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (ASCO) 2025 की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट ने नए सवाल खड़े किए हैं। अध्ययन में पाया गया कि लंबी दूरी की दौड़ या मैराथन पूरी करने वाले धावकों में कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण अधिक पाए गए।

अध्ययन की प्रमुख बातें

शोध में 35 से 50 वर्ष के 100 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिन्होंने कम से कम 5 मैराथन या 2 अल्ट्रामैराथन पूरी की थीं।

कोलोनोस्कोपी जांच में सामने आया कि 15% धावकों में एडवांस्ड एडेनोमा (प्री-कैंसर घाव) थे।

41% प्रतिभागियों में कम से कम एक एडेनोमा मौजूद था।
शोधकर्ताओं का मानना है कि लंबी दूरी की रनिंग के कारण पाचन तंत्र पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे आंतों में इंफ्लेमेशन और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों की राय

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर प्रोग्राम के सह-निदेशक डॉ. टिम कैनन कहते हैं—
“यह पहला ऐसा अध्ययन है जिसने संकेत दिया कि अत्यधिक दौड़ने वाले लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों के लिए नियमित कैंसर स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है।”

संतुलन है सबसे जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि रनिंग को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। बल्कि इसे संतुलित तरीके से, सही डाइट, पर्याप्त पानी और आराम के साथ करना चाहिए। रोजाना 15-20 मिनट की हल्की दौड़ या तेज वॉक पर्याप्त है।
अत्यधिक या लंबी दूरी की रनिंग से बचकर ही रनिंग को स्वास्थ्य के लिए फायदे का सौदा बनाया जा सकता है।

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माइक्रोप्लास्टिक- छोटे कण, बड़ा नुकसान – जानिए कैसे प्रभावित हो रही आपकी सेहत https://tejasbuzz.com/microplastics-tiny-particles-big-damage-learn-how-they-are-affecting-your-health/ Wed, 24 Sep 2025 09:50:56 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=18507

प्लास्टिक ने कभी इंसानों की जिंदगी को आसान बनाने का वादा किया था, लेकिन अब यही प्लास्टिक हमारी सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोज़मर्रा के पानी की बोतल, पैकेज्ड फूड और प्लास्टिक बैग में मौजूद सूक्ष्म कण, जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है, धीरे-धीरे हमारे शरीर में जमा हो रहे हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहे हैं।

शोधों से पता चला है कि माइक्रोप्लास्टिक अब लगभग हर इंसान के शरीर में मौजूद हैं। साल 2022 के अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पहली बार इंसानों के खून में इन कणों की पुष्टि की। ये छोटे-छोटे कण खून, अंगों और हड्डियों तक पहुंचकर सूजन, कोशिकाओं को नुकसान और गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं।

रोजाना औसतन हर इंसान लगभग 5 ग्राम माइक्रोप्लास्टिक निगल रहा है। यह कण न केवल खाने और पानी के जरिए शरीर में प्रवेश कर रहे हैं, बल्कि हवा और यहां तक कि नमक में भी मौजूद हैं।

हड्डियों पर असर:
ब्राजील के वैज्ञानिकों की समीक्षा में पता चला कि माइक्रोप्लास्टिक हड्डियों की मज्जा में मौजूद स्टेम सेल्स की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं। इससे हड्डियों का क्षय तेज होता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। इंटरनेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन की चेतावनी है कि 2050 तक हड्डियों के टूटने की घटनाएं 32 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।

फेफड़ों और कैंसर का खतरा:
हवा में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक कण फेफड़ों तक पहुंचकर सूजन, एलर्जी, अस्थमा और लंबे समय में फेफड़ों की क्षमता घटाने का काम कर सकते हैं। कुछ शोधों में इन कणों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी जोड़ा गया है।

बच्चों के लिए खतरा:
विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोप्लास्टिक बच्चों के लिए भी खतरा हैं। प्लास्टिक की बोतलों और पैकेज्ड फूड के लगातार इस्तेमाल से शरीर में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा बढ़ती है और शिशुओं में क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

निष्कर्ष:
विज्ञानियों का मानना है कि अगर समय रहते प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में लाखों लोग हड्डियों, फेफड़ों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करेंगे।

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कंप्यूटर, मोबाइल की ब्लू लाइट का खतरा- समय से पहले ही कर सकता है आपको बूढा https://tejasbuzz.com/the-dangers-of-blue-light-from-computers-and-mobile-phones-can-make-you-age-prematurely/ Thu, 18 Sep 2025 10:04:04 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=18309

आज की डिजिटल लाइफस्टाइल में मोबाइल और कंप्यूटर हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन क्लास या फिर दोस्तों से बातचीत—हर जगह स्क्रीन हमारे साथ रहती है। लेकिन यह सुविधा धीरे-धीरे हमारे स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। खासकर गैजेट्स से निकलने वाली नीली रोशनी (ब्लू लाइट) हमारी आंखों, दिमाग और त्वचा पर गहरा असर डाल रही है।

कई शोध बताते हैं कि लंबे समय तक स्क्रीन पर नज़रें गड़ाए रखने से न सिर्फ नींद खराब होती है, बल्कि यह समय से पहले बुढ़ापा (Premature Ageing) भी ला सकती है। लगातार ब्लू लाइट के संपर्क में रहने से थकान, हार्मोनल असंतुलन, त्वचा पर झुर्रियां और यहां तक कि मानसिक तनाव जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग घंटों कमरे या ऑफिस के अंदर काम करते हैं और बाहर धूप या प्राकृतिक रोशनी से दूर रहते हैं, उनके शरीर में विटामिन-डी की कमी और मोटापे जैसी परेशानियां जल्दी सामने आती हैं। अगर इसके साथ ब्लू लाइट का असर जुड़ जाए तो स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ जाते हैं।

अमेरिका की ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि लगातार ब्लू लाइट के संपर्क में रहने से शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock) प्रभावित होती है। यह न सिर्फ नींद और ऊर्जा स्तर बिगाड़ती है, बल्कि कोशिकाओं की कार्यक्षमता भी कम करती है। पशुओं पर हुए इस रिसर्च में स्पष्ट हुआ कि ब्लू लाइट ने उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर दिया और मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाया।

नींद पर असर, मोटापे का खतरा और त्वचा की चमक खोना—ये सब ब्लू लाइट की वजह से होने वाले दुष्प्रभाव हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक स्क्रीन से निकलने वाली यह रोशनी त्वचा पर झुर्रियां, दाग-धब्बे और समय से पहले बुढ़ापा लाने में अहम भूमिका निभाती है।

अगर आप भी दिनभर मोबाइल और लैपटॉप में डूबे रहते हैं, तो अब वक्त आ गया है कि सावधान हो जाएं और स्क्रीन टाइम को कम करें। प्राकृतिक रोशनी और बाहर की ताज़ी हवा आपके स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए बेहद जरूरी है।

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क्या सच में हेलमेट पहनने से झड़ते हैं बाल? जानिए हकीकत https://tejasbuzz.com/does-wearing-a-helmet-really-cause-hair-loss-find-out-the-truth/ Wed, 17 Sep 2025 11:10:33 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=18279

आज के समय में बालों का झड़ना आम समस्या बन चुकी है। खराब खान-पान, तनाव और बिगड़ी हुई दिनचर्या इसके बड़े कारण हैं। लेकिन अक्सर लोग यह भी कहते हैं कि हेलमेट पहनने की वजह से बाल झड़ते हैं या गंजापन आता है। सुनने में यह अजीब लगता है कि जो हेलमेट सिर को सुरक्षा देता है, वही आपके बालों का दुश्मन बन सकता है। तो आखिर इस दावे में कितनी सच्चाई है? आइए जानते हैं।

क्या सच में हेलमेट से बाल झड़ते हैं?

हकीकत यह है कि हेलमेट बाल झड़ने का सीधा कारण नहीं है। बल्कि, हेलमेट पहनने से जुड़ी कुछ आदतें और लापरवाही हेयर फॉल को बढ़ावा दे सकती हैं।

क्यों बढ़ता है हेयर फॉल?

पसीना और गंदगी का जमाव
लंबे समय तक हेलमेट पहनने से सिर में पसीना जम जाता है। इससे बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन हो सकते हैं, जो हेयर फॉल को बढ़ाते हैं।

स्कैल्प को हवा न मिलना
टाइट और बंद हेलमेट स्कैल्प को सांस लेने नहीं देता। इससे बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं।

साफ-सफाई की कमी
धूलभरे या गंदे हेलमेट का इस्तेमाल स्कैल्प पर डैंड्रफ, खुजली और रैशेज का कारण बनता है, जिससे बाल झड़ते हैं।

खराब क्वालिटी की पैडिंग
सस्ते या नकली हेलमेट में लगी खराब फोम स्कैल्प पर एलर्जिक रिएक्शन कर सकती है और हेयर फॉल को बढ़ा देती है।

बालों को सुरक्षित रखने के आसान उपाय

हमेशा अच्छी क्वालिटी और साफ हेलमेट का इस्तेमाल करें।

हेलमेट पहनने से पहले बालों को बचाने के लिए कॉटन का स्कार्फ या सॉफ्ट कैप लगाएं।

समय-समय पर हेलमेट की सफाई करें।

बालों की मजबूती के लिए संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद और सही हेयर केयर अपनाएं।

लंबे समय तक हेयर फॉल की समस्या हो तो डर्मेटोलॉजिस्ट से परामर्श लें।

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अथर्व से चैताली तक जाने कुछ अनोखे बेबी नेम्स https://tejasbuzz.com/from-atharva-to-chaitali-know-some-unique-baby-names/ Sun, 07 Sep 2025 11:29:54 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=17939

जब बच्चे के नाम की बात आती है तो माता-पिता अक्सर सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर कौन-सा नाम सबसे बेहतर होगा। नाम सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व और भविष्य से भी जुड़ा होता है। इसी वजह से आजकल लोग ऐसे नाम तलाशते हैं जो अनोखे हों, बदलते समय के साथ ट्रेंड में हों और सुनने में भी हटके लगें। तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही खास और यूनिक नाम, जो इस समय काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।

लड़को के कुछ यूनिक नेम्स 

1. आरव (शांति)

2. अद्वैत  (अनोखा )

3. अथर्व (पवित्र और शुभ)

4. देवांश (दिव्य अंश)

5. एकांश (एकमात्र अंश या पूर्ण)

6. गगन (स्वतंत्रता और दिव्यता का प्रतीक)

7. इन्द्रजीत ( इंद्र को जीतने वाला  )

8. ओजस (जीवन शक्ति या उर्जा )

9. विहान (आशा और नई शुरुआत का प्रतीक )

10. विवान (जीवन से भरपूर)

लड़कियों के कुछ यूनिक नेम्स 

1. आध्या  (माता दुर्गा)

2. अवनि (पृथ्वी)

3. भव्या (माता पार्वती)

4. ईशा (देवी पार्वती)

5. चैताली  (चैत्र के महीने में जन्मी)

6. इनाया (भगवान का उपहार)

7. जानवी (माँ गंगा )

8. कश्वी (प्रकाशमान)

9. लीला (दिव्य खेल)

10. नम्रता (विनयशील)

11. ओमिषा (जन्म और मृत्यु की देवी )

12.रचिता (सृजनकर्ता)

13. त्विषा ( उज्जवल)

हर नाम की अपनी एक पहचान होती है। इसलिए जब भी आप कोई नाम चुनें, तो सोच-समझकर चुनें। साथ ही, अपने बच्चों को जीवन की हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करें।  उनमें विनम्रता ज़रूर होनी चाहिए। वे सभी का सम्मान करना और इज़्ज़त देना जानें, यही असली पहचान है।

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क्यों होता है ब्लड शुगर लेवल हाई? आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ https://tejasbuzz.com/why-does-blood-sugar-level-become-high-lets-know-what-health-experts-say/ https://tejasbuzz.com/why-does-blood-sugar-level-become-high-lets-know-what-health-experts-say/#respond Fri, 29 Aug 2025 10:51:41 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=17616

आजकल हर उम्र के लोगों में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने की समस्या आम हो गई है। हाई ब्लड शुगर (डायबिटीज) केवल मीठा खाने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में इंसुलिन हार्मोन की गड़बड़ी से जुड़ी गंभीर स्थिति है। अगर इसे समय पर कंट्रोल न किया जाए, तो यह दिल, किडनी, आंखों और नसों तक को नुकसान पहुंचा सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 30 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को हर छह महीने में ब्लड शुगर की जांच अवश्य करानी चाहिए। इससे शुरुआती अवस्था में ही डायबिटीज का पता लगाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में करीब 54 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, वहीं भारत में तेजी से बढ़ते मामलों की वजह से इसे डायबिटीज कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड कहा जाने लगा है।

तो सवाल यह है कि आखिर किन वजहों से हमारा ब्लड शुगर लेवल लगातार बढ़ता रहता है?

शुगर लेवल कैसे बढ़ता है?

डॉक्टरों के अनुसार, जब हम भोजन करते हैं तो उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में बदलकर खून में पहुंचता है। सामान्य स्थिति में इंसुलिन इस ग्लूकोज को कोशिकाओं तक ले जाकर ऊर्जा में बदल देता है। लेकिन जब इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है या शरीर उसे सही तरह से इस्तेमाल नहीं करता, तो शुगर खून में जमा होने लगता है। लगातार 120 mg/dl से ऊपर का लेवल डायबिटीज की ओर इशारा करता है।

एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. वसीम गौहरी के अनुसार, चार मुख्य कारण ब्लड शुगर बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं:

1. नींद की कमी

अगर आप रोज़ाना 7 घंटे से कम सोते हैं तो शुगर लेवल बिगड़ सकता है। नींद की कमी से शरीर का हार्मोनल बैलेंस गड़बड़ा जाता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। इसके अलावा, कम नींद मीठा खाने की लालसा को भी बढ़ा सकती है।

2. ज्यादा फास्टिंग

बिना गाइडेंस के लंबे समय तक फास्टिंग करना भी शुगर लेवल बढ़ा सकता है। रिसर्च में पाया गया है कि इससे स्ट्रेस हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिससे डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरा बढ़ जाता है। उपवास करने से पहले और बाद में संतुलित आहार लेना जरूरी है।

3. लगातार तनाव

तनाव की स्थिति में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन ज्यादा मात्रा में बनते हैं। इससे शरीर में ग्लूकोज लेवल ऊपर चला जाता है और कोशिकाएं इंसुलिन को सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पातीं। यही वजह है कि क्रॉनिक स्ट्रेस डायबिटीज को और खराब कर सकता है।

4. देर रात भोजन

रात को देर से और भारी खाना खाने से शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी कम हो जाती है। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रात का भोजन हल्का और समय पर करें, ताकि ग्लूकोज को पचाने में शरीर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

निष्कर्ष:
ब्लड शुगर कंट्रोल में रखने के लिए समय पर जांच, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, तनाव से बचाव और सही समय पर भोजन करना बेहद जरूरी है। इन छोटी-छोटी आदतों में सुधार करके डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

(साभार)

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क्या सुबह उठते ही शरीर में होती है जकड़न? तो इन योगासनों का करें अभ्यास, मिलेगा आराम https://tejasbuzz.com/do-you-feel-stiffness-in-your-body-as-soon-as-you-wake-up-in-the-morning-then-practice-these-yogasanas-you-will-get-relief/ https://tejasbuzz.com/do-you-feel-stiffness-in-your-body-as-soon-as-you-wake-up-in-the-morning-then-practice-these-yogasanas-you-will-get-relief/#respond Thu, 28 Aug 2025 08:02:25 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=17565

सुबह उठते ही अगर शरीर में जकड़न, पैरों में खिंचाव या पीठ में अकड़न महसूस होती है, तो यह केवल नींद की वजह नहीं बल्कि स्वास्थ्य का संकेत भी हो सकता है। अक्सर यह ब्लड सर्कुलेशन की कमी, मांसपेशियों की कमजोरी, जोड़ों की समस्या, बढ़ता वजन या उम्र के असर के कारण होता है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो भविष्य में आर्थराइटिस, कमर दर्द, सर्वाइकल या घुटनों की समस्या का खतरा बढ़ सकता है।

सही दिनचर्या और सरल व्यायाम से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सुबह उठते ही अचानक बिस्तर से न उठें, बल्कि पहले 2-3 मिनट आराम से बैठें, हल्की स्ट्रेचिंग करें और गहरी सांस लें। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित योगासन से न केवल अकड़न दूर होगी, बल्कि शरीर ऊर्जावान और सक्रिय भी रहेगा।

नीचे कुछ सरल योगासन दिए गए हैं, जो सुबह की अकड़न को कम करने और जोड़ों की लचीलापन बनाए रखने में मदद करते हैं:

ताड़ासन (Mountain Pose)

सीधे खड़े हों और दोनों हाथ ऊपर उठाएं। एड़ियों को ऊपर उठाकर पंजों के बल खड़े रहें। पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचें और गहरी सांस लें। यह आसन पूरे शरीर में स्ट्रेच देकर अकड़न कम करता है और ऊर्जा बढ़ाता है।

पवनमुक्तासन

पीठ के बल लेट जाएं और घुटनों को मोड़कर सीने से लगाएं। दोनों हाथों से घुटनों को पकड़ें और गर्दन को उठाकर ठोड़ी को घुटनों के पास लाएं। 30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें। यह आसन कमर, पीठ और पैरों की अकड़न को दूर करता है।

भुजंगासन (Cobra Pose)

पेट के बल लेटें और हथेलियों को कंधों के पास रखें। सांस भरते हुए सिर और सीने को ऊपर उठाएं। नाभि तक शरीर उठाकर 15–20 सेकंड रुकें। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और पीठ की जकड़न को कम करता है।

वज्रासन

घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठें। रीढ़ को सीधा रखें और हथेलियों को जांघों पर रखें। 2-5 मिनट तक इसी स्थिति में बैठें। यह आसन पैरों और घुटनों की नसों को आराम देता है और शरीर को स्थिरता प्रदान करता है।

(साभार)

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दिल को रखें स्वस्थ, अपनाएं ये पौष्टिक शाकाहारी आहार https://tejasbuzz.com/keep-your-heart-healthy-follow-this-nutritious-vegetarian-diet/ https://tejasbuzz.com/keep-your-heart-healthy-follow-this-nutritious-vegetarian-diet/#respond Wed, 27 Aug 2025 09:40:50 +0000 https://tejasbuzz.com/?p=17532

तेज़ जीवनशैली, बढ़ता तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने हृदय रोगों को आम समस्या बना दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल लाखों लोग हृदय संबंधी बीमारियों से प्रभावित होते हैं और कई असमय मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। इसलिए अब जरूरी है कि हम अपने दिल का ख्याल रखें और आहार तथा जीवनशैली में ऐसे बदलाव करें जो दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखें।

पौष्टिक और संतुलित आहार से दिल की सुरक्षा

अध्ययन बताते हैं कि अधिक तैलीय, जंक फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ न केवल मोटापे का कारण बनते हैं, बल्कि ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को भी असंतुलित कर देते हैं। वहीं, संतुलित और पौष्टिक आहार, विशेषकर शाकाहारी विकल्प, दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद करते हैं।

प्लांट-बेस्ड डाइट के फायदे

हरी सब्जियां, फल, दालें, अनाज और मेवे हृदय के लिए बेहद लाभकारी हैं। इनमें मौजूद फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स धमनियों को साफ रखते हैं और बैड कोलेस्ट्रॉल कम करते हैं। इसके अलावा, यह ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।

दिल के लिए लाभकारी खाद्य पदार्थ:

नट्स और सीड्स:
बादाम, अखरोट, चिया सीड्स और अलसी के बीज में ओमेगा-3 फैटी एसिड और फाइबर होता है, जो ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखकर हृदय स्वास्थ्य को सुधारते हैं।

ग्रीन-टी:
इसमें मौजूद कैटेचिन्स एंटीऑक्सीडेंट्स हृदय के लिए लाभकारी हैं। रोजाना दो-तीन कप ग्रीन-टी पीने से ब्लड प्रेशर और दिल की अन्य समस्याओं का खतरा कम होता है।

एवोकाडो:
मोनोअनसैचुरेटेड फैट का अच्छा स्रोत, जो बैड कोलेस्ट्रॉल कम और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है। हफ्ते में दो बार एवोकाडो खाने से कार्डियोवस्कुलर रोगों का जोखिम 21% तक घट सकता है।

फाइबर युक्त सब्जियां और पत्तेदार साग:
पालक, केल, ब्रोकली जैसी सब्जियां फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-के से भरपूर होती हैं। ये रक्तचाप को नियंत्रित रखने और धमनियों को कठोर होने से बचाने में मदद करती हैं।

निष्कर्ष:
दिल की सेहत बनाए रखने के लिए सिर्फ व्यायाम ही नहीं, बल्कि सही आहार भी उतना ही जरूरी है। पौष्टिक और संतुलित शाकाहारी विकल्प अपनाकर आप अपने दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।

(साभार)

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