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ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना को नई गति, चार स्टेशनों के निर्माण की निविदा पूरी

ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना को नई गति, चार स्टेशनों के निर्माण की निविदा पूरी

126 करोड़ की लागत से बनेंगे धारी देवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर स्टेशन

देहरादून। उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित और सामरिक रूप से अहम ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब तेजी से अपने अगले चरण में प्रवेश करने जा रही है। रेलवे विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने धारी देवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर रेलवे स्टेशनों के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है। 126 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन स्टेशनों का निर्माण मेरठ स्थित आरसीसी एसोसिएट्स द्वारा किया जाएगा।

आरवीएनएल के अनुसार, कार्यदायी संस्था को दो वर्षों के भीतर इन आधुनिक स्टेशनों का निर्माण पूरा करना होगा। निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अब एक से डेढ़ माह के भीतर निर्माण कार्य शुरू किए जाने की तैयारी है।

वर्ष 2020 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। सुरंग निर्माण का कार्य लगभग 95 प्रतिशत से अधिक पूरा किया जा चुका है, जिससे परियोजना की प्रगति को लेकर रेलवे अधिकारियों में भरोसा बढ़ा है।

ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन पर कुल 13 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें वीरभद्र स्टेशन ऐतिहासिक है, जिसे पहले से मौजूद रेलवे नेटवर्क से जोड़ा गया है। इसके अलावा योगनगरी रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है और यहां से ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। वहीं शिवपुरी और ब्यासी स्टेशनों पर निर्माण कार्य प्रगति पर है।

रेल परियोजना के तहत पुलों के निर्माण में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। कुल 19 पुलों में से 8 पुल—चंद्रभागा, शिवपुरी, गूलर, ब्यासी, कोड़ियाला, पौड़ी नाला, लक्ष्मोली और श्रीनगर—पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं। शेष 11 पुलों का निर्माण कार्य भी 65 प्रतिशत से अधिक पूरा किया जा चुका है। सभी पुलों का निर्माण वर्ष 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

आरवीएनएल के उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने बताया कि पैकेज थ्री के अंतर्गत आने वाले स्टेशनों के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली गई है। कार्यदायी एजेंसी को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

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