Headline
आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन 2.0 की तैयारियों का डीएम ने लिया जायजा, धावकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन 2.0 की तैयारियों का डीएम ने लिया जायजा, धावकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
ट्रंप की जेलेंस्की को दो टूक चेतावनी, बोले- समझौता नहीं किया तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम
ट्रंप की जेलेंस्की को दो टूक चेतावनी, बोले- समझौता नहीं किया तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम
उत्तराखंड की बेटी IPS तृप्ति भट्ट को CBI में SP की जिम्मेदारी, देवभूमि का बढ़ाया मान
उत्तराखंड की बेटी IPS तृप्ति भट्ट को CBI में SP की जिम्मेदारी, देवभूमि का बढ़ाया मान
ड्यूटी पर जाते समय सड़क हादसे में पुलिसकर्मी प्रमोद कुमार का निधन, तीन बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
ड्यूटी पर जाते समय सड़क हादसे में पुलिसकर्मी प्रमोद कुमार का निधन, तीन बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि’ का नया गाना ‘जय हिंद’ हुआ रिलीज
सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि’ का नया गाना ‘जय हिंद’ हुआ रिलीज
चारधाम यात्रा में टूटा रिकॉर्ड, 60 लाख के पार पहुंची श्रद्धालुओं की संख्या
चारधाम यात्रा में टूटा रिकॉर्ड, 60 लाख के पार पहुंची श्रद्धालुओं की संख्या
22 से 26 अक्टूबर तक गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में न्याय यात्रा निकाली कांग्रेस
22 से 26 अक्टूबर तक गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में न्याय यात्रा निकाली कांग्रेस
नौ स्थानों पर 4G मोबाइल सेवा शुरू कराने की पहल, सांसद अजय भट्ट ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र
नौ स्थानों पर 4G मोबाइल सेवा शुरू कराने की पहल, सांसद अजय भट्ट ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को दी विजयदशमी एवं दशहरा पर्व की शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को दी विजयदशमी एवं दशहरा पर्व की शुभकामनाएं

दिल्ली दंगा मामला- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, उमर खालिद-शरजील इमाम को जमानत नहीं

दिल्ली दंगा मामला- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, उमर खालिद-शरजील इमाम को जमानत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को दी जमानत

नई दिल्ली। साल 2020 के दिल्ली दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय तक जेल में रहना या ट्रायल में देरी, अपने आप में जमानत का आधार नहीं बन सकता। हालांकि कोर्ट ने मामले के अन्य आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें जमानत प्रदान कर दी है।

अन्य आरोपियों को मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि इन आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप, उमर खालिद और शरजील इमाम की तुलना में अलग प्रकृति के हैं, जिस आधार पर उन्हें राहत दी जा सकती है।

ट्रायल में देरी को नहीं माना जा सकता जमानत का आधार

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने अपने फैसले में साफ कहा कि मुकदमे की सुनवाई में देरी को “ट्रंप कार्ड” के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने चेताया कि यदि केवल देरी के आधार पर जमानत दी जाने लगे, तो विशेष कानूनों के तहत बनाए गए वैधानिक सुरक्षा प्रावधान स्वतः ही कमजोर हो जाएंगे।

उमर खालिद और शरजील पर गंभीर आरोप

अदालत ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप बनते हैं। कोर्ट के अनुसार, इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर है, इसलिए दोनों को फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती।

दिसंबर में सुरक्षित रखा गया था फैसला

गौरतलब है कि 10 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने दोनों पक्षों को 18 दिसंबर तक अपनी दलीलों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज जमा करने का निर्देश भी दिया था।

पुलिस का पक्ष और आरोप

दिल्ली पुलिस के अनुसार, उमर खालिद, शरजील इमाम समेत अन्य आरोपी फरवरी 2020 में हुई हिंसा के कथित साजिशकर्ता थे। पुलिस का दावा है कि इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। आरोप है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के दौरान भड़की हिंसा का उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर अशांति फैलाना था।

दिल्ली दंगों की पृष्ठभूमि

पूर्वोत्तर दिल्ली में फरवरी 2020 में CAA और NRC के विरोध के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। आगजनी, पथराव और झड़पों की घटनाओं ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया था। इस मामले में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आरोपी बनाया गया, जिनमें से कुछ को अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है, जबकि कुछ को अभी भी जेल में रहना होगा।

Back To Top