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संघ का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, चुनावी राजनीति नहीं- मोहन भागवत

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अग्निवीर योजना में सुधार पर मंथन जरूरी- भागवत

देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के उत्तराखंड प्रवास के दूसरे दिन पूर्व सैनिकों एवं पूर्व सेना अधिकारियों के साथ प्रमुख जन गोष्ठी एवं समन्वित संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, चुनावी राजनीति नहीं।

भागवत ने अग्निवीर योजना को एक प्रयोग बताते हुए कहा कि अनुभव के आधार पर इसमें सुधार की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए। कश्मीर के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सतर्क नीति आवश्यक है।

भागवत ने कहा कि भारतीय समाज “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना पर आधारित है और समाज में सभी के लिए समान अवसर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कटुता के बजाय संवाद की परंपरा को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने संस्कार, बचत और समाज के प्रति योगदान की भावना विकसित करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में पूर्व मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत, कर्नल अजय कोठियाल और कर्नल मयंक चौबे ने भागवत को शाल ओढ़ाकर और पारंपरिक टोपी पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में सेना का नेतृत्व कर चुके छह सेवानिवृत्त जनरल, एक वाइस एडमिरल, डीजी कॉस्ट गार्ड, ब्रिगेडियर और 50 से अधिक कर्नल रैंक के अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा कप्तान और हवलदार रैंक से सेवानिवृत्त सैकड़ों पूर्व सैनिक सैन्य वेशभूषा में उपस्थित रहे। मंच संचालन राजेश सेठी ने किया।
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में समाज की केंद्रीय भूमिका होती है। समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि संगठित और चरित्रवान समाज ही राष्ट्र को स्थायी शक्ति प्रदान करता है।

संवाद सत्र में अग्निवीर, कश्मीर, सामाजिक समरसता और पलायन पर चर्चा की गई। संवाद सत्र में पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, अग्निवीर योजना, सामाजिक समरसता, पलायन और युवाओं से जुड़े विषयों पर प्रश्न पूछे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारी आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रभक्ति की परंपरा निरंतर चलती रही है। पलायन के मुद्दे पर कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय उद्यमिता के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे। समान नागरिक संहिता को उन्होंने राष्ट्रीय एकात्मता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

भागवत ने पूर्व सैनिकों से सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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