Headline
‘‘मुख्यमंत्री ने किया ‘सेवा विधि‘ पुस्तक का विमोचन‘‘
‘‘मुख्यमंत्री ने किया ‘सेवा विधि‘ पुस्तक का विमोचन‘‘
पटेलनगर क्षेत्र में कैफे के बाहर हुई फायरिंग का दून पुलिस ने किया खुलासा, आरोपी गिरफ्तार
पटेलनगर क्षेत्र में कैफे के बाहर हुई फायरिंग का दून पुलिस ने किया खुलासा, आरोपी गिरफ्तार
उत्तराखण्ड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने मांगे सुझाव
उत्तराखण्ड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने मांगे सुझाव
कम उम्र में बढ़ रहा दिल की बीमारियों का खतरा, जानिए कौन-सी आदतें बन रही हैं वजह
कम उम्र में बढ़ रहा दिल की बीमारियों का खतरा, जानिए कौन-सी आदतें बन रही हैं वजह
‘टॉक्सिक’ का नया गाना ‘मदहोश’ हुआ रिलीज, यश और तारा सुतारिया की केमिस्ट्री ने जीता दिल
‘टॉक्सिक’ का नया गाना ‘मदहोश’ हुआ रिलीज, यश और तारा सुतारिया की केमिस्ट्री ने जीता दिल
एकल महिला स्वरोजगार योजना: 212 नई महिलाओं को मिली सहायता राशि, 276 को जारी हुई दूसरी किस्त
एकल महिला स्वरोजगार योजना: 212 नई महिलाओं को मिली सहायता राशि, 276 को जारी हुई दूसरी किस्त
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून-मसूरी मार्ग के क्षतिग्रस्त मार्ग का किया निरीक्षण
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून-मसूरी मार्ग के क्षतिग्रस्त मार्ग का किया निरीक्षण
कल से शुरू हो रही भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज
कल से शुरू हो रही भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज
शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा, निफ्टी 24,000 के करीब
शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा, निफ्टी 24,000 के करीब

सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा अतिक्रमण केस की सुनवाई 2 दिसंबर तक टाली

सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा अतिक्रमण केस की सुनवाई 2 दिसंबर तक टाली

नैनीताल। बहुचर्चित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद अगली तारीख 2 दिसंबर तय कर दी है। अदालत ने हाईकोर्ट के हटाए जाने वाले आदेश पर लगी अंतरिम रोक को यथावत रखने का निर्देश दिया।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। यह याचिका अब्दुल मतीन सिद्दीकी द्वारा दायर लीव-टू-अपील से संबंधित है, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट की उस खंडपीठीय व्यवस्था को चुनौती दी है, जिसमें बनभूलपुरा क्षेत्र से रेलवे अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए थे।

सुनवाई के दौरान रेलवे, राज्य सरकार और प्रभावित पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। रेलवे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वार्या भाटी ने दलील देते हुए कहा कि रेल परियोजनाओं के विस्तार और निर्माण के लिए कुल 30 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इस भूमि पर मौजूद अतिक्रमण को हटाए बिना रेल सेवा विकास संभव नहीं है, इसलिए अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए।

राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक अत्रे ने पक्ष रखा। वहीं कब्जेदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, प्रशांत भूषण और अन्य वकीलों ने रेलवे के दावों पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जिस भूमि की मांग रेलवे अब कर रहा है, वह उसके पहले दिए गए लिखित दावे में शामिल नहीं थी। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि निर्माणाधीन रिटेनिंग वॉल के बाद रेलवे के ढांचे को कोई खतरा नहीं बचता।

कब्जेदारों की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विस्थापन के प्रस्ताव का भी विरोध किया गया। उनका कहना था कि बनभूलपुरा के निवासियों को जबरन हटाकर किसी अन्य स्थान पर बसाना अनुचित है। इस पर रेलवे के अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध जताया। अब अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को करेगी।

Back To Top