Headline
‘‘मुख्यमंत्री ने किया ‘सेवा विधि‘ पुस्तक का विमोचन‘‘
‘‘मुख्यमंत्री ने किया ‘सेवा विधि‘ पुस्तक का विमोचन‘‘
पटेलनगर क्षेत्र में कैफे के बाहर हुई फायरिंग का दून पुलिस ने किया खुलासा, आरोपी गिरफ्तार
पटेलनगर क्षेत्र में कैफे के बाहर हुई फायरिंग का दून पुलिस ने किया खुलासा, आरोपी गिरफ्तार
उत्तराखण्ड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने मांगे सुझाव
उत्तराखण्ड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने मांगे सुझाव
कम उम्र में बढ़ रहा दिल की बीमारियों का खतरा, जानिए कौन-सी आदतें बन रही हैं वजह
कम उम्र में बढ़ रहा दिल की बीमारियों का खतरा, जानिए कौन-सी आदतें बन रही हैं वजह
‘टॉक्सिक’ का नया गाना ‘मदहोश’ हुआ रिलीज, यश और तारा सुतारिया की केमिस्ट्री ने जीता दिल
‘टॉक्सिक’ का नया गाना ‘मदहोश’ हुआ रिलीज, यश और तारा सुतारिया की केमिस्ट्री ने जीता दिल
एकल महिला स्वरोजगार योजना: 212 नई महिलाओं को मिली सहायता राशि, 276 को जारी हुई दूसरी किस्त
एकल महिला स्वरोजगार योजना: 212 नई महिलाओं को मिली सहायता राशि, 276 को जारी हुई दूसरी किस्त
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून-मसूरी मार्ग के क्षतिग्रस्त मार्ग का किया निरीक्षण
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून-मसूरी मार्ग के क्षतिग्रस्त मार्ग का किया निरीक्षण
कल से शुरू हो रही भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज
कल से शुरू हो रही भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज
शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा, निफ्टी 24,000 के करीब
शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा, निफ्टी 24,000 के करीब

सेल्‍फी के लिए आए दिन युवाओं की जा रही जान

सेल्‍फी के लिए आए दिन युवाओं की जा रही जान

अमन भारत
वीडियो बनाने के दौरान ऐसा लगता है कि विवेक का उपयोग करने के बजाय इस तरह की भेड़चाल में शामिल हो गए लोगों के पास सही वक्त पर फैसला लेने की क्षमता भी नहीं बचती और इसी क्रम में वे किसी जानलेवा हादसे का शिकार हो जाते हैं। अपनी दिलचस्पी या फिर खुशी के लिए कुछ अलग करने का शौक सामान्य तौर पर सकारात्मक माना जाता है। मगर इस तरह के शौक में कोई अपना विवेक या सूझ-बूझ की क्षमता ही खो दे, तो यह न सिर्फ एक बेमानी चलन की भेड़चाल में शामिल होना है, बल्कि जानलेवा जोखिम को न्योता देना भी है।

जब से स्मार्टफोन के साथ हर हाथ में कैमरा पहुंचा है, तब से काफी लोगों के भीतर एक विचित्र-सी मनोदशा का विकास होता देखा जा सकता है, जिसमें वे मौके-बेमौके बिना किसी मायने के अपनी तस्वीरें उतारते रहते हैं। इसका विस्तार सोशल मीडिया पर खुद को अभिव्यक्त करने के रूप में हुआ और हर वक्त अपनी तस्वीर या फिर वीडियो बना कर प्रसारित कर देना मानो किसी जरूरी काम की तरह देखा जाने लगा। विडंबना यह है कि इस शौक ने विवेक को जिस बुरी तरह प्रभावित किया, उसका खमियाजा केवल आपसी व्यवहारों के स्तर पर नहीं उठाना पड़ा, बल्कि इस वजह से मौत की घटनाएं भी बढ़ती गई हैं। आए दिन ऐसी खबरें आती हैं कि सोशल मीडिया पर रील के आकर्षण में वीडियो बनाने की कोशिश में हादसे का शिकार होकर किसी युवा की जान चली गई।

ये नाहक और बिना किसी कारण के होने वाली मौतें हैं, जिनके पीछे महज विवेकशून्य होकर अपने किसी शौक को पूरा करने की भूख मुख्य वजह है। हरिद्वार में बुधवार को बीस वर्ष की एक छात्रा ने रेल की पटरी पर रील बनाने की कोशिश की और उसी समय आई ट्रेन की चपेट में आ गई। उसकी जान चली गई। जिस बच्ची को अभी पढ़ाई-लिखाई करनी थी, खेलना-कूदना था और भविष्य बेहतर बनाने के सपने देखने थे, वह सिर्फ रील बनाने के शौक में मारी गई। इस तरह की घटनाओं का एक सिलसिला-सा चल पड़ा है। ऐसा लगता है कि विवेक का उपयोग करने के बजाय इस तरह की भेड़चाल में शामिल हो गए लोगों के पास सही वक्त पर फैसला लेने की क्षमता भी नहीं बचती और इसी क्रम में वे किसी जानलेवा हादसे का शिकार हो जाते हैं। आधुनिक तकनीकों की उपयोगिता हमारी जीवन-स्थितियों में गुणात्मक सुधार लाती है, लेकिन बेलगाम और गैरजरूरी तरीके से इसके इस्तेमाल में डूब जाना वक्त बर्बाद करने का जरिया बनने से लेकर जानलेवा तक साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top